नवरात्रों के नो दिनों में
(तर्ज : जपूं माला……..)
नवरात्रों के नो दिनों में, मांग रहा वरदान, पूजा करता रहूं हमेशा, हटे कभी ना ध्यान, जपूं माला, जपूं माला ।।
पहला वर भक्ति का देना, मन में तुम्हें बिठाऊं, दूसरा वर शक्ति का देना, काम सभी के आऊ, मात पिता की करूं मै सेवा, तीसरा हो ये ज्ञान || 1 ||
चोथा वर ये दो शरीर को, रोग ना कोई सताये, मिले पांचवां वर भी ऐसा, कभी ना उलझन आये, छठे नवरात्रे विद्या मांगू, अमृत रस का पान ।। 2 ।।
सप्तमी के दिन कंरू जागरण, भाग्य जगा दो मेरे, और अष्टमी हवन कंरू मैं, रखू सदा व्रत तेरे, नवमी के दिन वर ये देना, ना जगे अभिमान ।। 3 ।।
दसों दिशाएं चलती हवाएं, तेरे ही गुण गाये, धरती, अम्बर, चाँद, सितारे, तुम को शीष झुकाये, तीन लोक, चवदह भुवनों में, तेरी ऊंची शान ।। 4 ।