(तर्ज : बाइसारा बिरा जयपुर …)
बिनायक म्हार आंगणे बिराजो जी ब्याव रो सारो थे कारज सारो जी।
(१) ऊंचो तो थान आसन देवां जी, सगला स्यूं पेली म्हे थान मनावां जी…
(२) रिद्धि सिद्धि र साग बेगा पधारो जी, रोली और मोली स्यूं म्हे थान मनावांजी
(३) फूलां स्यूं थारी झांकी सजावां जी लाडू से थार म्हे भोग लगावां जी
(४) गजानन्द थान सगला ही ध्यावां जी, सगला ही थार म्हे धोख लगांवां जी
विनायक म्हार आंगण…