सतसंगत से सुखमिलता है
जीवन का कण-2 खिलता है।
सत्संगत से सद्ज्ञान मिले
सत्संगत से भगवान मिले
पानी से पौधा फलता है
② सतसंगत से वैराग्य बढ़े
सतसंगत से सौभाग्य बढ़े
दीपक से दीपक जलता है
③ नास्तिक भी आस्तिकता पाता
पापी भी पावन बन जाता
चाबी से ताला खुलता है।
मानव को जैसा संग मिले ॥
कपड़े जैसा रंग मिले ।।
बस उसी ढंग में ढलता है।
⑤ मोती सीपी में बूंद बनी
साँपों के मुह में जहर कणि
संगत से भाग्य बदलता है।