इक्षु रस के जैसा भिक्षु नाम तेरा ।
केलवा के योगी लो प्रणाम मेरा ॥
तू प्रखर दिवाकर मै सघन अंधेरा
बल्लुशा के लाडले, दीप दीपा मात के
केलवा के केवली धनी अपनी बात के
स्वर्ग छोड़ मेरे मन में कर बसेरा,
तेरापंथ स्वामी तब सुखो का मूल है।
तेरापंथ में कही शूल है ना धूल है ।।
भ्रान्ति है ना भ्रम है पंथ है निराला(खुशी का सवेरा)
③ जगमग जग हो रहा तेरे योग दान से
सिरियारी तीर्थ बना भिक्षु निर्वाण से
रंग है वो सांचा तूने जो बिखेरा।
④ तेरी ज्योति का वो क्रम नाथ अब भी चल रहा
आज तेरे पंथ पर ग्यारहवां दीप जल रहा
दीप से जले दीप दूर हो अंधेरा