Banni – Mishri Su Meethi Baata Thari
Banni मिश्री सु मीठी बाता थारी मन है प्रेम को झरनो सा, कांच भी थांसू शर्मा जावे एसो रूप सजिलो सा, बन्नी थारो चाँद सरीसो मुखड़ो कोई नजर नहीं लगजायबन्नी थोड़ा हल्लवे-हल्लवे चालो कोई मोच नहीं पड़ जायबन्नी थारो चांद सरीसो मुखड़ो कोई नजर नहीं लगजायथोड़ा हल्लवे-हल्लवे चालो कोई मोच नहीं पड़ जाय केसर की […]