Tapsya Geet

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Ek Chhoto So Tapsi

तपस्या एक छोटो से तपसी बिर तनम खुशी, बिर मन में खुशी  ओ बात काई रे बताऊं थान आज मै बिरा दादोसा पूछे बिरा दादीसा पूछे तपसी  काई रे खावण री थार मन में  म्हतो पिज्जा कोनी खाऊ, म्ह तो बर्गर कोनी खाऊ  अबक तपस्या करण री मन मे  बिरा पापाजी पूछे- 2 बिरा मम्मी […]

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Mehandi Rachan Lagi

लय – मेंहदी राचण लागी मेहंदी राचण लागी हाथा में तपसी र नाम री  आई शुभ घड़ी देखो म्हारे आंगण आजजी  बाजे बाजे रे शह‌नाई तपसी र नाम री  आई शुभ घड़ी देखो  तप करके तपसी कुलरो नाम दिपायो  अनुमोदना हो, अनुमोदना करूंतपसी थारेनाम री आई शुभ घड़ी  तपसी री देखो अदभुत है माया  देखो

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Aaj Hamare Ghar Aangane Me Dekho Khushiya Chhayi

आज हमारे घर आँगन में  (तर्जः माईनी माई मुंडेर पे) आज हमारे घर आँगन में देखो खुशिया छाई  , सौ-सौ साधुवाद  उन्ही को, तप में शक्ति जगाई  तपस्या करल्यो थे, तपस्या करल्यो थे। ① भिक्षु शासन की बगिया में, तप का फूलखिला है  बड़े भाग्य से ऐसा नन्दनवन, गण हमें मिला है , इस उपवन

Bhachya, Tapsya Geet

Aasro Shasan Devi Tharo

आसरो शासन देवी थारो ( तर्ज : कोई जब राह न पाये….) आसरो शासन देवी थारो, थे कष्ट निवारो, पधारो म्हारै आंगणियै पधारो, अठाई की करै तपस्या ।। घर-घर में सज्यो है दरबार, तपसी नै साता री दातार, थाने जो ध्यावै करो थे बेड़ा पार-२, म्हानै थे दीज्यो जी बल थारो ।। २. बाई थे

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Tap Ka Hum Karte Abhinandan

तप का हम करते अभिनंदन (लय – कैसी वह कोमल काया रे….) रचयिता – नचिकेता मुनि आदित्य कुमार तप का हम करते अभिनंदन, गूंज रही आवाज।  तप है सचमुच कितना पावन, गूंज रही आवाज।  हिम्मत से खिलता तप उपवन, गूंज रही आवाज। तप का काम निराला, कर सकता साहस वाला।  तप से बनती काया कुन्दन

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Swagat Tapsya Ro

स्वागत तपस्या रो  (लय – होली आई रे….)  रचयिता – नचिकेता मुनि आदित्य कुमार स्वागत तपस्या रो, तपसी नै सगला आज बधावै रे तप गुण गरिमा गावे रे, स्वागत…. नाम सुण्या ही छुटे धूजणी, दिन में तारा दिख ज्यावै। सुदृढ़ मानस बलवालो ही, तप मे स्वागत. काटै तपसी अनगिन पातक, अभय जन चार कषायां री

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Shubh Sanskaroday Dwara

शुभ संस्कारोदय द्वारा (लय – ऐ मेरे वतन के लोगों….) रचयिता – नचिकेता मुनि आदित्य कुमार शुभ संस्कारोदय द्वारा, तप पथ पर कदम बढ़ाया। पाकर आनंद अनोखा, निज जीवन धन्य बनाया।। आसान नहीं तप करना, आवश्यक मानस बल हैं,  पातक सारे धुल जाते, चेतन बनता निर्मल हैं।  हिम्मत दिखलाई तुमने, गण-गौरव शिखर चढ़ाया ।। पाकर

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Tapsi Bhai Ke Angan Me Bol Rahi Hai Devi

तपस्या गीत,( लय- माई नी माई मुंडेर पे तेरी) तपसी भाई के आंगन में, बोल रही है देवी,  तप करलो थे बेला आई, कह रही है देवी,  जैनम् जयति शासनम्, शासन देवी शासनम्- चांद की तरह चमक रही थी, उस देवी की काया,  द्वार पे मेरे, आके उसने, नींद से मुझे जगाया,  तप का रंग

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Dekho Tapsan Ke Aaj Upwas Hai

(लय- फिरकी वाली तू कल फिर आना) कोका कोला टमाटर आलू छोला, इन सब का त्याग है देखो तपसण के आज उपवास है। वो मारासा आएं, वो पचखाण कराएं वो मांगलिक सुनाए, इन सब का का ठाठ है  देखो तपसण के आज उपवासहै वो सुसरासा आए, वो सासुजी आए वो चौबीसी सुनाएं, इन सब का

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Mhe Bhav Badhavan Aaya

म्है भाव बढावण आया (तर्जः चैत्य पुरुष जग जाए) म्है भाव बढावण आया, म्है साता पूछण आया,  तपसण थांरी साता पूछण, दूर दूर स्युं आया । म्है भाव बढावण आया.. 1 १) काम है पुरो टेढो मेढो, विरला हीं कर पावै,  नाम सुन्या हीं गुड गुड बाजे, आंख्या बारै आवै,  ललचाई जिह्वा पर (सृष्टि) आज

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