Jain Bhajan

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Arihanto Ko Namskar

अरिहन्तों को नमस्कार अरिहन्तों को नमस्कार,  श्री सिद्धों को नमस्कार  आचार्यों को नमस्कार,  उपाध्यायों को नमस्कार,  जग में जितने साधुगण हैं, मैं सबको वन्दू बार-बार ।। ऋषभ, अजित, सम्भव, अभिनन्दन, सुमति, पदम, सुपार्श्व जिन राज।  चन्द्र, पुष्प, शीतल, श्रेयांस, नमि, वासुपूज्य पूजित सुर राज।  विमल-अनन्त-धर्मजस उज्ज्वल, शान्ती-कुन्थु-अर मल्लि नाथ ।।  मुनिसुव्रत, नमि, नेमि, पार्श्व प्रभु, […]

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Navkar Prarthna

महामन्त्र – नवकार प्रार्थना नवकार मन्त्र है महामन्त्र, इस मन्त्र की महिमा भारी है। आगम में कही, गुरुवर से सुनी, अनुभव में जिसे उतारी है। ।टेर ।।  अरिहंताणं पद पहला है, अरि आरति दूर भगाता है। सिद्धाणं सुमिरन करने से, मन इच्छित सिद्धि पाता है। आयरियाणं तो अष्ट सिद्धि और नव निधि के भण्डारी हैं।।

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Jai Jinendra Boliye

जय जिनेन्द्र बोलिये जय जिनेन्द्र, जय जिनेन्द्र, जय जिनेन्द्र बोलिये।  जय जिनेन्द्र के स्वरों से, अपना मौन खोलिये ।  जय जिनेन्द्र ही हमारा एक मात्र मंत्र हो,  जय जिनेन्द्र बोलने को, हर कोई स्वतंत्र हो,  जय जिनेन्द्र बोल 2 खुद जिनेन्द्र हो लिये ।।1 जय जिनेन्द्र, जय जिनेन्द्र बोलिए पाप छोड़,  धर्म जोड़, यह जिनेन्द्र

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1.Samvtsari Par 2.Shama Yachna Geet

पर्व संवत्सरी मनाते चलो (तर्ज : जोत से जोत जलाते चलो)  पर्व संवत्सरी मनाते चलो, सबको हृदय से खमाते चलो बैर विरोध भुलाकर सभी, सबको गले से लगाते चलो  पर्व संवत्सरी मनाते जीवन में है द्वेष घृणा का घोर अन्धेरा छाया मोहमाया की रंगरलियों में जीवन है भटकाया  दीप क्षमा का जलाते चलो, पर्व संवत्सरी

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Ab Saunp Diya Is Jeevan Ka Sab Bhar Tumhara Charno Me

अब सौंप दिया जीवन का अब सौंप दिया इस जीवन का, सब भार तुम्हारे हाथों में। है जीत तुम्हारे हाथों में, और हार तुम्हारे हाथों में।। मेरा निश्चय बस एक यही, एक बार तुम्हें पा जाऊँ मैं। अर्पण कर दूँ दुनियाँ भर का, सब भार तुम्हारे हाथों में।।1।। अब सौंप दिया इस जीवन का जो

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Gyan Ka Deepak Jalte Chalo( Paryushan)

ज्ञान का दीपक जलाते चलो (तर्ज -जोत से जोत जगाते चलो) ज्ञान के दीपक जगाते चलो, पर्व सुखों का मनाते चलो, धधकते जो क्रोध शोले उठे, समता के जल से जगाते चलो  मन मन्दिर में जाने लगे है, चंदन झाड ले लो, प्रेम की उजली चादर ले के, जीवन को चमका लो सबको गले से

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Solah Sati Stawan

सोलह सती स्तवन आदिनाथ आदि जिनवर बंदी, सफल मनोरथ कीजिये ए । प्रभाते उठी मांगलिक कामे, सोलह सतीनो ना लीजिए ए ।। १. बाल कुमारी जग हितकारी, ब्राह्मी भरत नीं बेनडी ए। घट-घट व्यापक अक्षर रूपे, सोलह सती मांही जे बड़ी ए ।। २. बाहुबल भगिनी सती सिरोमणी, सुन्दरी नामे ऋषभ सुता ए ।  अंक

Adhyatmik, Jain Bhajan, Nirgun, Satsang

Man Ko Shant Banaye Hum

सास सांस पर परमात्मा का ध्यान लगाये हम  किमन को शान्त बनाये हम 1 जीवन है संग्राम इसे जीना सीखे हम  अमृत व विष दोनों को पीना सीखे हम  लाभ अलाभ हर्ष, शोक में सम बन जाए हम  मन को शान्त बनाये हम कि मनको – 2. वर्तमान में जीने का अभ्यास बढ़ाते जाएं 2 

Gyanshala, Jain Bhajan

Naya Savera Aaya(bacho Ke Liye)

(तर्ज – लकड़ी की काठी) नया सवेरा  आया नई रोशनी लाया।  हीरे जैसा मानव जीवन पुण्योदय :से पाया ।। भेदभाव को भूलो, समता, रस में फूलों ।  परमात्मा को पानी है तो संतो के पद छूलो ।। झुक झुक-२ ऊँचा निज आचार हो प्रेम भरा व्यवहार  हो । . एक बनों और नेक बनों सबमे

Jain Bhajan, Paryushan

Paryushan Parv Aaya Hai

पर्युषण पर्व आया है, अनोखा रंग, छायाा है   आत्म चिंतन    आत्म उत्थान  का संदेश लाया है। ① सु सौरस फैली है तप की ये देखोआज कण कण में दैष को धो दिया मनसे  समता स्रोत बहाया है ② ये पावन पर्व आया हूँ लेकर इक नया सन्देश  जगाले आत्म शक्ति को मिटाले क्षीणता मन

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