गणेश वंदना
( लय- सावन का महीना)
सबसे प्रथम मनावा थाने देवा रा सरदार।
रणतभंवर सूआप पधारो हो रही जय जय कार ,
शंकर सुत थाने दुनिया है ध्यावे ,
गिरिजा भवानी थाने लाड लडावे
थे मूसे चढ़ कर आओ थारी खूब करा मनुहार
रणत भंवर से आप पधारो हो रही जय जय कार ,
दूंद दूंदांला थे हो सूंड सुंडाला,
थांरे गले में सोहे मोतीयन की माला,
पीतांबर वस्त्रा रो थे खूब करो श्रृंगार ,
रणतभंवर सूआप पधारो हो रही जय जय कार
लड्डू वन रो बाबा थाने भोग लगावा
तिलक लगावा थाने मीठा भजन सुनावा ,
दयावंत वरदायक थे विनायक महाराज ,
रणतभवर सुआप पधारो हो रही जय जय कार ,
खाता बहिया में थारो नाम है लिखी जै
शादी विवाह में थाने प्रथम नूतीजै
भक्त थारा गुण गावे ,थे खूब भरो भंडार
रणत भंवर से आप पधारो हो रही जय जय कार