म्हारी चंद्र गौरजा रत्ना Ro Khambo Dikhe Door Syu

 म्हारी चंद्र गौरजा 

म्हारी चंद्र गौरजा रत्न रो खम्बो दिखे दूर स्यू ,

ओह  म्हाने आव् अचम्भो सौतन र महला राजन क्यूँ गया 

ओ म्हारी पायल बाजे चढ़ती रा बाजे म्हारा बिछीया 

उड़ जाए तीतरी दिवलो नजर आवे म्हारी सौत रो, म्हारी चंद्र गौरजा। …. 

आधी नदिया कांकरा जी कोई आधी बालू रेत् 

आधी गौ री सेज म जी कोई आधो हिवड़े हेत ,म्हारी चंद्र गौरजा। …… 

साजन चाल्या चाकरी जी कोई कांधे धरी बन्दुक 

के तो साग  ले चलो जी कोई के कर दो दो टूक, म्हारी चंद्र गौरजा। ….. 

दाड़म सूखे बाग म जी कोई घर सूखे कचनार,

 गौरी सूखे सेज म जी कोई परदेसी की नार ओ महारि चंद्र गौरजा। ….  

थलिया पड़ियो काचरोजी कोई लावण स्यू मुड़ जाय 

सौतन रा भरमाया साजन सेजा स्यू उठ जाय 

म्हारी चंद्र गौरजा कोयल़डी़ कूके चंपा डाल रे 

उड़ जासी मोरियो कोयल बोले ला मीठी तान रे 

     

     

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