जल जमना रो पाणी
जल जमना रो पाणी कइया ल्याउ ओ रसिया पतली लुल लुल जाय -२
छोटोड़ी नणद म्हारी पानी कोनी लावे ‘बा घरा बैठी हुकुम चलावे ओ रसिया ,
पतली कमर ——
सर पर घड़लो ,घड़े पर मटकी ,मटकी ऊपर कलशो कोणी चाले ओ रसिया
पतली कमर म्हारी ——-
ऊँची ऊँची पाल घडो कोनी डूबे ,बीच म जाऊ तो डर लागे ओ रसिया
पतली कमर म्हारी लुल लुल जाय ——-