चेतन ले लै शरना चार, सांचों आरो ही आधार,
सारो स्वार्थियो संसार,कोई थारो नही है।
1.श्री अरिहंत सिद्ध अणगार,सांचों धर्म हिय में धार
ओ ही करंसी बेड़ा पार,और चारों नहीं है,।
2.जो तू होणो चावे न्याल,आं च्यारा रो पल्लों झाल
थारे माथे उभो काल,कोई पतियारो नहीं है
3.जिला होकर रही सचेत,आं च्यारा स् यु राखी हेत
चिड़िया चुग जावे ली खेत, और रूखालो नहीं है
4.पग पग पर थारे लूंटाक, था पर रहता निशानौ ताक, आं च्यारा रो शरणो राख,और सहारों नहीं है
5.ए है अत्राणा रा त्राण,ए है अप्राणा रा प्राण,
तुलसी करै कोड़ कल्याण,थारो म्हारो नहीं है