जो कुछ भी पाप हुआ तुमसे मिच्छामि दुक्कडं लेता हूं,
भगवान आपकी साक्षी से मिच्छामि दुक्कडं लेता हूं
गुरु देव आपकी, साक्षीसेमिच्छामिदुक्कडंलेताहूं,
अपनी आत्मा की साक्षी से मिच्छामि दुक्कडं लेता हूं
1.पंचाश्रव पाप अठारह का, जो सेवन किया कराया हो।
इस भवमे या पिछले भवमे, मिच्छामि दुकक्डं लेता हूं
2.कर्मों के र्कता राग द्वैष,ये नाच नचा ते है मुझको।
इनके वश जो दुष्कर्म किये, मिच्छामि दुकक्डं लेता हूं
3.कंहा कंहा पर मैं ने जन्म लिये, कंहा कंहा पर कैसे मरण किये, है अता पता कुछ भीन कंही
मिच्छामि दुकक्डं लेता हूं
4.कितनों से नाता जोड़ा है कितनों से नाता तोड़ा है उन सब से खमत -खामणा कर, मिच्छामि दुकक्डं लेता हूं
5.जो मद प्रमाद में पाप हुए, अनजान-जान में पाप हुए,उन सबका आत्मसाक्षी से मिच्छामि दुकक्डं लेता हूं
6.सम्यक -दरशन सद्ज्ञान चरण का कभी नहीं आचरण किया भटका मिथ्यात्वं मोह में जो, मिच्छामि दुकक्डं लेता हूं
7.भव भव में मुझको बोध मिले,संयम समता के फूल खिले मुनि शोभा आत्म शांति पाने, मिच्छामि दुकक्डं लेता हूं