(तर्ज : धरती धोरा री)
आओ धरती पर एक बार, सुण्ल्यो भक्ता री पुकार ।
दे दो म्हाने थोड़ा प्यार, आओ माताजी, हो हो आवौ माता जी ।। टेर ।।
भारत भू पर पाप बढ़यो है, पापी नव इतिहास रचियो है। सगलें धर्म प्रभाव घटियो है ।। आओ 2
सतयुग द्वार त्रेता आया 2 कलयुग जबरा नाच नचाया । धुजै धरती री आ काया ।। आओ
सुरज स्वागत शंख बजावै 2
चँदो चांदनी छिटकावै। चारो दिशा गीत यूं गावै ।। आओ
गंगा पगल्यां धोणा चावै, 2
सागर जोर हिलौरा खावै।
टाबर जयकारा गुजावै ।। आओ
थांरी ओल्यू घणी आवे – 2 सगला दर्शण करणा चावै सोचा माताजी झट आवै ।। आओ