हे संच्चिया माता मुझ पर
(तर्ज : होठो से छुलो तुम, मेरे गीत)
हे संच्चिया माता मुझ पर, थोड़ी सी दया कर दो । मैं भक्त तुम्हारा हूँ, मेरा जन्म सफल कर दो ।। टेर ।।
ऊँचे पर्वत पर मां, तेरा मन्दिर अति सोहे । छवि तेरी बड़ी प्याारी, भक्तों का मन मोहे । कैसे रिझाऊँ तुझे, भक्ति से मन भर दो ।। मै भक्त……
तेरे द्वार पे आयें हैं, मां संच्चिया मेहर करो । बुद्धि से भरा जीवन, सुख के भण्डार भरो । खाली है मेरी झोली उसको भी जरा भर दो ।। मै भक्त……
मेरा तन मन मैय्याजी, तुझ पर बलिहारी है ।। मैने तो विनती करी, अब मर्जी तुम्हारी है। कितनी दयालु हो मां, थोड़ी सी नजर कर दो ।। मै भक्त…..
तूं माता जगत की है, भक्तों को प्यारी है । बच्चे हैं तेरे मां हम, तुम मात हमारी है । चरणों में ‘भक्त’ तेरे, अब शीश हाथ धर दो ।। मै भक्त……