झोली भरद्यो जी मैय्याजी
(तर्ज : धमाल)
झोली भरद्यो जी मैय्याजी, थारै क्यांको घाटो जी, क्यांको घाटो, क्यांको घाटो, क्यांको घाटो जी 2
तीन लोक री सारी पूंजी, मैय्या थारे हाथां में, जग सेठाणी थे कहलावों, कुछ तो बांटो जी ।। 1 ।।
मै तो हूँ छोटो सो बन्दो, नाम काम भी छोटो जी, जीवन में आगै बढ़ ज्याऊं, दुःखड़ो छांटो जी ।। 2 ।।
गुजर बसर हो माँ मस्ती में, सरपट गााड़ी भाजै जी, लाचारी तो कदै ना आवै, संकट काटो जी ।। 3 ।।
एक बार में दे द्यो मैय्या, बार-बार नहीं आऊं जी, अब कै पार करो मेरी नैय्या, प्याद्यो नाको जी ।। 4 ।।