लाल चुनड़िया ओढ़े मैय्या लगती सुन्दर हो
(तर्ज : उड़ जा काले कांवा)
लाल चुनड़िया ओढ़े मैय्या लगती सुन्दर हो, सजधज कर यूँ बैठी मैय्या, प्यारी लगती हो,
सब के संकट हरना मैय्या सब के कष्ट हरो,
मेरी विपदा टालो मैय्या, अब तो रहम करो, कि आज तू आ जाना, करिश्मा दिखा जाना ।।
रूप सुहाना जो कोई देखे, वो दिवाना हो,
मन भावन मन मोहने वाली, दिल में बसती हो, दूजा कोई और नहीं है, तुझ सा कोई दानी, दान सदा ही करती रहना, मेरी माता रानी ।। 1 ।।
सिंह सवारी करती लगती, तुम बलशाली माँ,
रक्षा भगत की करती, मुस्काती रहती ओ माँ,
जिसने पकड़ी डोरी तेरी, उसने फिर ना छोड़ी, नैनों में छवि प्यारी तेरी, संग ही रहती हो ।। 2 ।।
तेरे दर जो भी आए, जाए ना वो खाली,
कठिन चढ़ाई जो चढ़कर आए, ले झोली खाली, तुमने उसकी झोली भर दी, मैय्या संच्चियां राणी, सुन ले मैय्या अर्ज हमारी, आ जा जग कल्याणी ।। 3