Mehandi Rachi Thare Hatha Me

(Lay -mehandi rachi thare)
मेंहदी रची थारे हाथां में, घुल रह्यो काजल आंख्या में, चुनड़ी को रंग सुरंग मां सांचल मां-2, फूल खिले थारे बागा में, चांद उग्यो मां रातां मं, थारो इस्यो सुहाणो रूप, मां सांचल मां ।। थारो इस्यो.
रूप सुहाणो जद स देख्यो, नींदड़ली नहीं आंख्या मं। म्हारे मन पर जादू करग्यो, थारी मीठी बातां न ।। भूल गयो सब कामा न, याद करूं थारे नामां न ।।1।।
थारो इस्यो.
थे कहो तो मैय्या थारी, नथली बण ज्याऊं मैं।। नथली बण ज्याऊं थारै, होठा स लग ज्याऊं मैं।। चूडलो बणू थारे हाथा मं, बोर बणूं थारे माथे मं, बण ज्याऊ बाजूबन्द मां सांचल मां ।।2।। थारो इस्यो.
थे कहो तो मैय्या थारी, पायलड़ी बण ज्याऊं मैं। पायलड़ी बण ज्याऊं थारै, चरणां स्यूं लग ज्याऊं में ।। हार बणूं थारे गल्ला मं, मोती बणूं थारे झूमका मं, नैणा मं करल्यूं बंद मां सांचल मां – 2।।3।। थारो —-

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