(लय-सावन का महीना)
आ गई है मैंया भवन(शहर ) में मचा शोर)
मैं बनी पतंग मेंरी मैया बन गई डोर)-२
इधर घुमायें चाहे उधर घूमाये
जिस और चाहे मैया मुझको नचाये)-२
नाच रही मैं ऐसे जैसे वन में नाचे मोर –+
जिससे भी चाहे, मैया पैंच लड़ाये
पास बुलाये चाहे दूर भगाएं
कटू या मैं वापस आऊ मैया की ओर —
रंग बिरंगी मां ने मुझको बनाया
सुख और दुख का मैल कराया
मां के हाथ में डोरी वो ले जायें जिस ओर
मैं बनी पतंग में री मैया बन गई डोर