(लय – मनुष्य जनम अनमोल रे )
मायरे की चुनड़ी देख के चंदो भी शरमा गयो,
नजर उत्तारण खातिर देखो सूरज नीचे आगयों
आगणियें में आज खुशी रा घूघरा बाजे।
भात भरणन आयो बीरो भावज के सांगे
श्वेत पुष्प बरसे अम्बर से तीन लोक सरमा गयो
के भारी के हल्की है आ चुनड़ी अनमोल
भाई बहन के प्रेम को जग मे नही है कोई मौल
बहना सागे भाई नाचे आनंद मंगल छागयो