(लय – चाहे राम बनके चाहे श्याम बनके)
छम -छम करती अन -धन भरती मैया लक्ष्मी पधारो मेरे अंगना
मैया सागर के मंथन से आई,श्री विष्णु को जाकर के ब्याही
हरी को साथ लेके ,कमल हाथ लेके ,मैया लक्ष्मी पधारो मेरे —
शेष सय्या पे आसन लगाये,अपने स्वामी के चरण दबाये
देव ध्यान धरते ,गुण गान करते
मैया लक्ष्मी पधारो मेरे अंगना
तेरे माथे मुकुट है निराला, कानों में कुंडल डाला-२
गले हार चमके, मुख भाल चमके
मैया लक्ष्मी पधारो मेरे अंगना
छम छम करती अन धन भरती मैया लक्ष्मी पधारो मेरे अंगना