आयो सुरंगो सावन
(तर्ज : आए हो मेरी जिंदगी में तुम बहार बनकर ,)
आयो सुरंगो सावन, बरसी है मेघ धारा-२। तप री बहावो गंगा हो… – २ बुझ जावे अब अंगारा ।। ध्रव ।।
भिक्षु री वा कहानी, सम्यकत्व साधना री।
घड़ियाँ सुहानी ल्याया, प्रभुवर आराधना री। अब तो रचाणी मेहंदी, आध्यात्म रा सिनारा ।।१ ।।
तप री बहाओ…..
सृष्टि री कलियां खिलगी, अंकुर दिलां रा खिलसी। आस्था री उजली, मन रे, मंदिर में ज्योत जलसी। पूजा आ भिक्षु री, भवजल स्यूं दे किनारा ।। २ ।।
तप री बहाओ…..
पावन मुहुर्त्त है ओ, ई संघ स्थापना रो।
तेरापंथ सर्व व्यापी, पथ है प्रभु ओ थांरो।
राही सभी ई पथ रा, मंगल बण्या नजारा ।। ३ ।।
तप री बहाओ…..
है धर्म कद बपौती, मुस्लिम हो या ईसाई।
आ नींव भिक्षु गुरुवर, रोपी फसल लगाई।
पावस रो लाभ लेणो, स्वाध्याय ध्यान द्वारा ।।४।।
तप री बहाओ…..
हे भिक्षु आप जग पर, उपकार हद कर्यो है।
आलोक स्यूं जगत ओ, प्रभु आप ही भर्यो है।
ई विश्व में सुयश रा, आछा बज्या नगारा ।।५ ।।
तप री बहाओ…..