(लय-बादलियो आंखडल्या)
अभिनंदन वर्षीतप तप रो, सब मिल मंगल गावांला, आंगन में।
अभिनंदन तपसी रे तप रो, तप री, अलख जगावालां परिकर में।।
सब मिल मंगल गावाला आंगन में,।
1. वर्षीतप रे शुभ अवसर पर, फेल्यो तप रो च्यानणों,
उल्लासां स्यु भरग्यो म्हारों, आज पूरा आंगणियो
नयो उजाला आवैला कण-कण में।। सब मिल मंगल गावांला आंगन में
2. म्हारी तपसन इं नगरी में, रच्यो नयो इतिहास है,
महावीर रे गण-उपवन में फैली मधुर सुवास है।
उजली कडी जुड़ जावैला शासन में।।
सब मिल मंगल गावाला आंगन में
3. स्वीकारो अभिनंदन म्हारों, वर्षीतप रे वास्ते,
और हजारां लोग चालसी इ तपस्या रे रास्ते।
मुक्ति रो स्वाद मिल जावैला जीवन में।। सब मिल मंगल गावाला आंगन में
4. पूरे परिवार री, थे ले ल्यो मंगल भावना,
वर्षीतप रे लारे बढ़सी, गण री घनी प्रभावना।
नयो जोश जग जावैला जन जन में।। सब मिल मंगल गावांला आंगन में।
5. गुरुवर री प्रेरणा स्यूं, वर्षीतप रो रंग निरालो है,
बारी-बारी पीकर देखो, ओ अमृत रस रो प्यालो है। जनमां रा पाप कट जावैला क्षण – क्षण में।।