(तर्ज : भक्तों को दर्शन)
भक्तों के मन में बस गयो रे, ओ अंजनी को लालो, राम की सेवा पा गया रे, ओ अंजनी को लालो ।।
बाल समय रवि मुख में दबायो, अदभुत शक्ति रो रूप दिखायो, जग में नाम कमा लियो रे ।। 1 ।।
मात सीया की सुध ले आयो, सोने की लंका पल में जलायो, राम को काज बणाय दियों रे ।। 2 11
शक्ति लगी जब लाल लखन के, मूर्छित होय पड़े धरती पे, बूंटी ल्या प्राण बचा दियों रे ।। 3 ।।
बालाजी नै जो कोई मन स्यूं ध्यावै, बसी बैकुण्ठ अमर पद पावै, “भक्त मण्डल” नै भा गयो रे ।। 4 11