Bhari Hai Samta Jivan Me, Varshitap Geet

(लय-चुड़ी जो खनकी)

भरी है समता जीवन में, किया काम बड़ा ही कमाल देखो इस परिकर में
1. कहने में आसान लगे, करने पर ही पता चले, 
मन पर जीत करे जो भी, पाए मंजिल वो पहले वर्षीतप का जीवन में, किया काम बडा ही कमाल इस परिकर में।
2. दृढ़ता और विश्वास रखा, संयम रस का स्वाद चखा समतामय करके खुद को, वर्षीतप रथ पैर रखा, 
फैली है ज्योति तन-मन में, 
किया काम बडा ही कमाल इस परिकर में।
3. तप से ही कष्टों का हल, सुखमय हो जाता 
हर पल, अमृत सम है तप का पान, मंगल होता है प्रतिपल फूल खिले मन उपवन में, 
किया काम बडा ही कमाल इस परिकर में।
4. जैन जगत का जो चन्दन, उस वर्षीतप तप को वन्दन तप पर बरसे श्रद्धा सुमन करने तप का अभिनन्दन। 
छाई है खुशियां कण-कण में। किया काम बडा ही कमाल इस परिकर में।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top