(तर्ज : मिलो ना तुम तो)
एक दिन वो भोले भंडारी, बनकर के बृज नारी गोकुल में आ गए हैं. पार्वती जी मना के हारी, ना माने त्रिपुरारी गोकुल में आ गए है ।।
पार्वती से बोले, मैं भी चलूगां तेरे संग में, राधा संग श्याम नाचे, मै भी नाचूंगा तेरे संग मैं, रास रचेगा बृज में भारी, हमें दिखाओ प्यारी ।।
गोकुल
ओ मेरे भोले स्वामी, कैसे ले जाऊं तुम्हे साथ में, मोहन के सिवा वहां, कोई पुरुष ना जाए रास में, हंसी करेगी बृज की नारी, मानो बात हमारी ।।
गोकुल
ऐसा बना दो मुझे, कोई ना जाने इस राज को, मैं हूँ सहेली तेरी, ऐसे बताना बृजराज को, लगा के बिंदीया, पहन के साड़ी, साथ चले मतवाली ।।
गोकुल
देखा मोहन ने, समझ गए वो सारी बात रे, ऐसी बजाई बंशी, सुध बुध भूले भोलेनाथ रे, सिर से खिसक गयी जब साड़ी, मुस्काये गिरधारी ।।