Shubh Sanskaroday Dwara

शुभ संस्कारोदय द्वारा

(लय – ऐ मेरे वतन के लोगों….)
रचयिता – नचिकेता मुनि आदित्य कुमार
शुभ संस्कारोदय द्वारा, तप पथ पर कदम बढ़ाया। पाकर आनंद अनोखा, निज जीवन धन्य बनाया।।
आसान नहीं तप करना, आवश्यक मानस बल हैं, 
पातक सारे धुल जाते, चेतन बनता निर्मल हैं। 
हिम्मत दिखलाई तुमने, गण-गौरव शिखर चढ़ाया ।।
पाकर आनंद….
रोगादी सब मिट जाते, नव तेज प्रकट होता हैं। 
सुर नर गुण गौरव गाते, शिवधाम निकट होता हैं।
 सपना फलवान हुआ है, मुश्किल तप सरल बनाया ।।
पाकर आनंद….
मुनिवर की शुभ सन्निधि में तप गुलशन आज खिला है इस धर्मकार्य में सबका समुचित सहयोग मिला है। संकल्पशक्ति के द्वारा, तप में पुरुषार्थ दिखाया ।।
पाकर आनंद….

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