(म्हार माथे की बिंदिया चमके)
साजन आसी आंगणे सोलहा करू सिणगार,
चौक पुराउ मोतिया कोई घणी करु मनुहार .
म्हार माथे की बिंदिया चमके ,
म्हार हाथा में चुड़लो खनके
म्हार बादिलो घर आसी ,
मान बो हंस हंस बतलासी
म्हारो मन मुलके-2
म्हार माथा की बिंदिया चमके —-हो
सुन उतरादी बादली उमड़ घुमड़ के आजे – 2
मरवण के महला में बादली इमरत रस बरसाजे-2
मैं नेणा काजल सारू, मैं तन मन बां पर वारू -2
सावणियो सुरगों आसी ,म्हार बालम न संग ल्यासी
अरे बादल बरसो जमके
म्हार माथे की बिंदिया चमके
बागा म कोयलिया बोल, मीठा गीत सुनावै -२
पिया मिलण रोप्यासो मनडों मरवण सुगन मनावै-२
मैं नदिया ज्यू इतराऊं म्हार पिया क मन बस जाऊं
म्हारो छैल छबिलो आसी हिवड़े सू मनै लगासी
कि म्हारो दिल धड़के
म्हार माथे की बिंदिया चमकै