Tap Me Tej Gajab Ko Bhai

तप में तेज गजब रो भाई! आशा आंबो फल ज्यावै। संच्योड़े करमां रो कचरो, एक पलक में जळ ज्यावै ॥ स्थायी ॥
वै जनम जनम रा बंध्योड़ा, बंधन घालै भारी फोड़ा। अटकावै आगै बढ़ती, आत्मा रै मारग में रोड़ा। दौड़ा-दौड़ मचावै तो भी, कोई नजर न हल आवै ॥1॥
आळस में उलझ्योड़ो मनड़ो, गोते पर गोता खावै, मदवै हाथी ज्यू अंकुश स्यूं, भी वश में कोनी आवै। मंत्र हाथ में आज्या तप रो, पासा सुंवो ढल ज्यावै ॥2॥
मोटा-मोटा रोग मिटै, तनड़ौ बण ज्यावै कंचन सो, अंतर शोधन स्यूं लागै, शीतल मलयाचल चंदन सो। शूर सिपाही री सरणी आ, कायर दूरा टळ ज्यावै ॥3 ॥
ज्ञान, ध्यान, स्वाध्याय, साथ में, जप माळा रो ले सरणो, चौरासी रे चक्कर स्यूं जदि, चावै है जल्दी तरणो। ‘मधुकर’ चढ़ तप नाव सामने, जीवन ओ पल-पल ज्यावै ॥4 ।।
(लय-माटी री आ काया)

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