Tap Sukhkari,Mangalkari

(लय-पीलो)

तप सुखकारी, मंगलकारी, हो तप री महिमा अति भारी, भव-भय हारी जी, तपस्या है तरणी ॥ स्थायी ॥

तन मन रा सब रोग मिटावै, ही आत्मा ने ऊजळी बणावे, शिखर चढ़ावे जी-तपस्या है तरणी ॥१॥ 
वीर पुरुष ही तप अपणावै, ही कष्टां, स्यूं नहीं घबरावै, शौर्य दिखावे जी-तपस्या है तरणी ॥2॥
कायर री तो काया कंपावै, हो नाम सुण्या घबरावे, जी अकुलावे जी-तपस्या है तरणी ॥३॥
भूख भुआजी जद घर आवै, हो दिन में ही तारा दिख जावे, चक्कर खावे जी-तपस्या है तरणी ॥4॥
बातां बणाणी भाई घणी है सोरी, हो रसना ने जीतणी है दोरी, बड़ी चटोरी जी-तपस्या है तरणी ॥5॥
हिम्मत धारे बांरे आवे शुभ घड़ियां, ही घ्छा जावे घर में रंगरकियां, बेहद खुशियां जी-तपस्या है तरणी ॥6॥
देवे ‘प्रमोद’ थांने आज बधाई, ही बढ़ता ही रहिज्यो सवाई, सुखदायी जी-तपस्या है तरणी ॥7॥
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