Tapsya Ki Sijan Aayi Re

तपस्या री सीजन आई रे

(तर्ज : एक तो संदेशो म्हारो सालासर में दीज्यो रे)
सीजन आई रे तपस्या री, अब थे तपस्या करल्यो रे।
क सीजन आइ रे ।। ध्रुव ।।
तपस्या री है रूत मस्तानी, सावण भाद्रव महिना रे।
तपस्या री गंगा में न्हावो, भाई-बहनां रे।
क सीजन आइ रे ।।१।।
बेलो-तेलो और अठायां, पखवाड़ो थै करल्यो रे।
मासखमण री नावड़ली में, भव-जल तरल्यो रे।
क सीजन आइ रे ।।२।।
तपस्या रा है लाभ घणैरा, इणस्यूं नातो जोड़ो रे।
भव-भव रै संचित कर्मा नै, तप स्यूं तोड़ो रे।
क सीजन आइ रे ।।३।।
ई तन री सब आधि-व्याधि ने, तपस्या जड़ स्यूं काटै रे।
कंचन सी काया बण ज्यावै, इमरत अनूठो रे।
क सीजन आइ रे ।।४।।
तपस्या रो है कवच अनूठो, जैन धरम रो खूंटो रे।
तपस्वियां रो थै पढ़ल्यो, इतिहास अनूठो रे।
क सीजन आइ रे ।।५।।
अ.भी.रा.शि.को. मंत्र देखल्यो, तप रो मोल बतावै रे। अंतरमन नै विमल बणा दे, घणो सुहावै रे।

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