(तर्ज : प्रभु पार्श्व देव चरणों में)
तपस्या श्रावक जीवन का अभिनव श्रृंगार है। तपस्या से होती नैया भव सागर पार है ॥
१. तप करने वाले होते सौभाग्यशाली हैं। कर्मों के वृन्द टूटते, होता उद्धार है ॥
२. यह तन अनाज का पुतला खाऊं खाऊं करता। जिसने ही मन को साधा, जीवन का सार है ॥
३. तप करने वालों के ये चेहरे मुस्काते हैं। अन्तर का ताप मिटाने यह तप सुखकार है ॥
४. तप के आगे देवों का भी सिर झुक जाता है। तप की महिमा हर युग में ही अपरम्पार है ॥