(तर्ज : तुमसे लागी लगन)
तेरी शरण मिले, भव संताप टले, त्रिशलानन्दन ! तेरे चरणों में शत शत वन्दन ॥
१. खुशियां लेकर तुम महलों में आए। छाई रौनक, जन हरसाए। बरसा कण कण अमन, विकसित जन जन मन ॥ त्रिशला…
२. चन्दनबाला को तुमने है तारा। अर्जुनमाली का भार उतारा। जिसने ले ली शरण, खिल गया मन उपवन, त्रिशला…
३. तुमने समता का सूर्य उगाया। लघुता प्रभुता का भेद मिटाया। खिलता तेरा गुलशन, सुरभित धरती गगन, त्रिशला…
४. युग यह तेरे उपदेशों को चाहे। पाए जन मानस मैत्री की राहें। तू ही तारण तरण, मिटे जन्म मरण, त्रिशला नन्दन !
स्वर-सौरभ / २५