Trishala Nandan Ke Gun Hum,

मन मंदिर में दीप जलाएं

त्रिशला नन्दन के गुण श्रद्धा से हम गाएं। शीश झुकाएं। भक्ति भाव से मन मंदिर में दीप जलाएं ॥
१. कुण्डलपुर में जन्मे प्रभुवर, सिद्धार्थ कुल उजियारे। भारत की पांवन वसुधा पर चमके वे जगमग तारे। प्रभु दर्शन कर सब हरसाए ॥
२. केवल ज्ञान मिला जब प्रभु ने ज्ञान रश्मियां फैलाई। लाखों गुमराही चरणों ने सही डगर तुमसे पाई। ज्ञान मिला सत्पथ पर आए ॥
३. सभी जीव जीना चाहते हैं महावीर ने बोध दिया। समता जीवन में अपनाने का प्रभु ने उद्घोष किया। मैत्री पथ पर कदम बढ़ाएं ॥
४. महावीर की वाणी महाप्रज्ञ गुरुदेव सुनाते हैं। ग्राम नगर में घूम-घूम संदेश सुभग पहुंचाते हैं। हम अपना कर्तव्य निभाएं ॥
(तर्ज : झिलमिल सितारों का)

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