(लय-जनम जनम का साथ)
वर्षीतप की रोशनी में जीवन चमकाएं, ये जीवन चमकाए, आओ तप की धारा में, जीवन नैया को तिराएं।।
1. मिट जाता है सारा, जीवन में अंधियारा,
मिलता रहा हरदम, सुख का ही उजियारा।
तप का तेज अनूठा, हम इसको शीश नमाएं।।
2. काम नहीं आसान ये, सरल लगे कहने में,
मन चंचल घबराता है, भूख को सहने में।
तप जो भी करते हैं, हम उनको धीरे बधाएं ॥
3. तन तो सभी सजाते, मन को कौन सजाएं,
तप वो कुंदन जिससे, तन मन निखरा जाएं।
पावन फुल चरण में, हम गीत खुशी के गाएं।।
4. त्याग बडा संसार में, जिसको पूजा जाता,
समझे जो भी शक्ति, वो ही इसे अपनाता।
मंगल होगा तपसन का समता जब लक्ष्य बनाएं।।