आओ स्वामीजी
लय : धरती धोरां री
आओ स्वामीजी …..३
थाने झाला देर बुलावा, जाजम पलकाँ री बिछावाँ कुंम-कुम पगल्यां स्यूं पधरावां ॥ स्थायी ॥
थांरी पल-पल रटन लगावां, निश दिन पल-पल छिन-छिन ध्यावां ।
थांरी गौरव-गाथा गावां, आओ स्वामीजी ……३ ॥१ ॥
मानस मंदिर में बिठास्यां, दीया भक्ति रा जलास्यां ।
म्हारा तन-मन चरण चढास्यां ।, आओ स्वामीजी ….. ३ ॥२॥
थांरो नाम लियां बल जागै, डर भय हड़को धड़को भागै।
जाणे हरदम थे हो सागै, आओ स्वामीजी ….. ३ ॥३॥
तेरस रो दिन पावन आयो, भिक्षू चरमोत्सव रंग छायो ।
जन-मन आनंद घन लहरायो, आओ स्वामीजी ३॥४॥ …
थारे कदमां पर बढ पावां, बचनां पर भै प्राण चढावां ।
शासन रो सम्मान बढावां, आओ स्वामीजी ३ ॥५॥
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