भिक्षु भिक्षु भिक्षु म्हारी आत्मा पुकारें
(लय : खमा खमा खमा ओ)
भिक्षु भिक्ष भिक्षु म्हारी आत्मा पुकारें
भिक्षु रो साचो पर चो पायोजी ओ।
जद-जद भीड पड़ी भक्ता में तो,
स्वामीजी रो शरणों आडो आयोजी हो।
शोभजी श्रावकने नाथद्वारा जेल में,
सदेह दरसण देवण भिक्षु आयाजी।
उठता तडाक बेड्या टूट दूर पड़गी,
देख सारा इचर ज पायाजी ओ।
स्वमामीजी नै सिंवरया जद जोधपुर दरबार में,
पटवो जी पूरी बाजी लेग्या जीओ।
रुपांजी रो खोड़ो टूट्यो रावलिया रै रावले,
तो राजी-राजी घर का दीक्षा देग्या जी ओ॥
धगधगता खीरा बर स्या बीदासर में,
हो गया बेहोश संत बाकी जी ओ।
जयाचार्य तन्मय स्तवना सुणाई, ‘
मुणिन्द मोरा’ ढाल आज साखीजी ओ॥
जबलपुर जांवतां चम्पक मुनि नै,
शेर दो बबरची मिलग्या जी ओ।
भिक्षु-स्वाम-भिक्षु-स्वाम नाम सहज्यां निकल्यो
बीस हाथ शेर दूर टलग्या जीओ ॥
बोरावड़ रे ठाकरा पर सेन्या चढ़ आई
मघवा गणी सरण सुनाई जी ओ
कोट सू उतरती फोजा दिखी अनगिनती
दौड़ता कुचामन पाछा आया जी ओ
दीपा रो दुलारों प्यारो हार हियारो
संकटमोचन हारो अजमाल्यो जीओ
अपनों जांण सावल वत्सलता सेपुचकार कर
चंपक ने एकरस्या हिये लगाल्यो जीओ