चन्द दिनों का जीना रे बन्दे
(तर्ज : कसमें वादे प्यार वफा सब……)
चन्द दिनों का जीना रे बन्दे, ये दुनिया मकड़ी का जाल,
क्यों डूबा विषयों में पगले, हाल हुआ तेरा बेहाल ।।१।।
आखिर होगा तेरा जाना, कोई न साथ निभायेगा,
तेरे कर्मों का फल बन्दे, साथ तुम्हारे जायेगा,
धन दौलत से भरा खजाना, पड़ा यहीं रह जायेगा ।।२।।
दया धर्म संयम के द्वारा, मुक्ति मंजिल पायेगा,
तेरे त्याग की अमर कहानी, सारा जमाना गायेगा,
चिन्तन करले इन बातों का, जन्म सफल हो जायेगा ।।३।।
ये तन है माटी का नश्वर, माटी में मिल जायेगा,
मुट्टी बाँधे आया है तूं, हाथ पसारे जायेगा,
“वीर मण्डल” कहता है सुनले, गया वक्त नहीं आयेगा ॥४॥