1devtavji ki Ghodi
पीपली पान दुपानी ओ राज,
गेरो फूल गुलाब रो
जठ तेजण घोड़ी बांधी ओ राज, हरीया हरीया जौ चर । ज्यां पर राम लक्ष्मण चढ़सी ओ राज, जनकपुर जनकपुर कर रया ।
कोई म्हान जनकपुर बतावो ओ राज, कोई म्हान सीता आन मिल ।
अर्जुन जनकपुर बतासी ओ राज, सुर्जन सीता आन मिल । पिंपली पान दूपानी ओ राज, गेरो फुल गुलाब रो ।
जठ लीली घोड़ी बांधी ओ राज, हरीया हरीया जौ चर । ज्यां पर बालक बनड़ो चढ़सी ओ राज, सासरीयो, सासरीयो वे कर
कोई म्हान सासरीयो बतावो ओ राज,
कोई म्हान बनड़ी आन मिल जंवाई सासरीयो बतासी ओ राज, बालक बनडी आन मिल ।
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देवता की घोड़ी नं. 2
घोड़ी म्हारी चन्द्र मुखी ईन्द्र लोका स्यूं आई ओ राज । आई रतनारी ओ तेजण ठाण बन्धाई ओ राज ।
हरी हरी दुब चर लीली दुधारी धाई ओ राज ।
नागर बेल चर लीली दूधारी धाई ओ राज ।
आज म्हे तो आज सखी एक इचरज देख्यो ओ राज । आज वसुदेव कुलनन्दन चोक्यां बिराज्या ओ राज । चोक्यां बिराज्या ठाकुरजी न देवता जंवा ओ राज ।
देवता जंवा ठाकुर जी न रुक्मण परणाई ओ राज ।
बोल म्हारी बाई ओ सुधरां इमृत वाणी ओ राज ।
नगरी में हाल हुई, हलकार हुई, खवरदार हुई
कोई हाकम परण्या ओ राज।
घोड़ी म्हारी चन्द्रमुखी साजन लोकां स्यूं आई ओ राज । आई रतना री ओ तेजण ठाण बंधाई ओ राज ।
हरी हरी दूब चर लीली दुधारी धाई ओ राज ।
नागर बेलचर लीली दुधारी धाई ओ राज ।
आज म्हें तो आज सखी एक इचरज देख्या ओ राज । आज (नाम)जी रो छावो चोक्यां विराज्या ओ राज । चोक्यां विराज्या लाडलड़ न सजना जंवा ओ राज । सजना जंवा लाडलड़ न बनड़ी परणाई ओ राज ।