Gor Ka Jwara

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• जंवारा रा गीत 1
ऊंच मगर ओ म्हारा हरीया जंवारा लुलीया जंवारा नीचजी मीरगा ज्यों चर ।
मिरगा घेरो जी कासबजी रा सूरजजी घेरो नी बन रा मिरगला ।
मिरगा घेरो ओ बढ्मादासजी रा ईश्वर दासजी घेरो नी बन रा मिरगला ।
म्हे क्यू घेरा ओ म्हारी नार पातलड़ी गोर साँवलड़ी,
म्हारी बाई सुधरां सासर, म्हारी बाई रोवां बापर ।
धोला बलदांओ बीरा बैल जुतावो बैल जुतावो ल्यावो गोरां बाई री तीजण्या ।
बाई रा नैणा ओ बीरा मेंह बरसलो, भवरा ओ चमक बीजली ।
(अब इस तरह परीवारका नाम लेणा)
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२.
हाथ माय छड़ी रे गुलाब की सूरजजी बायवा न जाय, म्हारा हर्या जंवारा ओ राज, म्हारा लुलिया जंवारा ओ राज ।जल भर झारी हाथ में बहु रेणा दे सीचं वान जाय म्हारा हरिया
उभी बाई सुधरा बाई य केव ए भावज थारो म्हारो अमर सुहाग, म्हारा हरिया
हाथ माय छड़ी रे गुलाब की ईशर जी बाय बान जाय म्हार हर्या जल भर झारी हाथ में गोरा दे सीच बान जाय म्हारा हर्या
उभी बाई रोवां बाई यू केव ए भावज थारो म्हारो अमर सुहाग म्हारा हर्या
(अब परीवार का नाम लेणा
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3
केशर की क्यार्या म हरिया जंवारा तो लेर ल्यो जी लेर ल्यो ।
(भाई) सूरज जी रा बाया, रैणा दे सिंच्या तो लेर ल्यो जी लेर ल्यो ।
रैणा दे रा सिच्या (भाभी), सुधरां बाई पुज्या तो लेर ल्यो जी लेर ल्यो ।
सुधरां बाई रा (बहन) पुज्या (जंवाई), सूरज जी बोलाया तो लेर ल्यो जी लेर ल्यो।
(इसी तरह परिवार का नाम लेण)
4
म्हारा हरीया जंवारा ओ क गेहूं लाल सरस बढ्या ।
ए तो सूरज जी रा बाया ओ बहु रैणा दे सींच लिया ।
भावज सींच न जाण्या ओ क गेहूं पिला पड़ गया।
बाइ जी दो घड़ सिंच्या ओ क लाम्बा तीखा सरस बढ्या ।
म्हारो सरस पटोलो ए क बाई सुधरां पेर लियो ।
म्हारो डब्बो भरीयो गेणो ए क बाई रोवां पेर लियो ।
गज मोतीड़ा रो हारो ओ क बाइजी पेर लियो ।
म्हारी बोरंग चूनड़ ए क बायां बायां ओढ़ लिया ।
म्हारी दूध भरी कटोरी ए क बाई गुड़ीया पीय गई।
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