Jago Re Jago Re

(लय : उड-उड रे म्हारा काला रे कागला)
जागो रे जागो रे जागो रे म्हारा सोया सुवटिया 
नित उठ तुलसी भजन करो। 
सांझ सबेरे तुलसी भजो ॥
मन मन्दिर में तुलसी बिराजै। 
श्रद्धा सुमन चढ़ालै जीवड़ा ॥ नित उठ .. ॥१ ॥
तुलसी मन्त्राक्षर है साचो 
जप स्यू भव तर जारे जीवड़ा ॥ नित उठ .. ॥२ ॥
तुलसी जप्यां स्युं विघ्न टले है।
 वांच्छित काज पुराले जीवड़ा ॥ नित उठ .. ॥३ ॥
तज प्रमाद पुरुषार्थ जगाले 
दुर्लभता न भूला रे जीवड़ा ॥ नित उठ .. ॥४॥
शासन सेवा सूत्र बणाले 
सुख मोती निपजा रे जीवड़ा ॥ नित उठ .. ॥५ ॥
जीवन शैली स्वस्थ बणाले । 
आरोग्य पथ अपना ले जीवडा ॥ नित उठ .. ॥६॥

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