(संघ-गीत)
(लय : अमर रहेगा धर्म हमारा)
जय जय धर्म संघ अविचल हो
संघ संघपति प्रेम अटल हो
जय जय धर्म ….. ॥ध्रुव ॥
हम सबका सौभाग्य खिला है, प्रभु यह तेरापंथ मिला है। एक सुगुरु के अनुशासन में, एकाचार विचार विमल हो।
जय जय धर्म ॥१॥
दृढ़तर सुन्दर संघ संगठन। क्षीर-नीर सा यह एकीपन । है अक्षुण्ण संघ मर्यादा, विनय और वात्सल्य अचल हो।
जय जय धर्म ॥२॥
संघ संपदा बढ़ती जाए प्रगति शिखर पर चढ़ती जाए। भैक्षव शासन नन्दन वन की, सौरभ से सुरभित भूतल हो।
जय जय धर्म ॥३॥
‘तुलसी’जय हो सदा विजय हो।संघ चतुष्टय बलअक्षय हो। श्रद्धा भक्ति बहे नस-नस में, पग-पग पर प्रतिपल मंगल हो।
जय जय धर्म ……।।४॥