किंवाडी खोल हियैरी
(लय : मिलो न तुम हम घबरायें)
माटी री मूरत है काया, क्यूं तू देख लुभायो ? किंवाड़ी खोल हियै री। झूठी सारी ममता माया, थोथै भरम भुलायो, किंवाड़ी खोल हियै री ॥ स्थायी ॥
जीणो है थोड़ो सो, किसी बात पर तूं बण्यो आकरो ? खावै पंसेरी री, फैंके जो दूजां ऊपर कांकरो, करै जिसो ही भरै जगत में, क्यूं तूं समझ न पायो ॥१ ॥
ढीलो भलाई में तू, घणो है बुराई में उतावलो, स्याणो कहावै कोरो, कामां स्यूं लागे पूरो बावलो सुलझण चाल्यो पण उलझण में, खुद नै खूब फंसायो ॥२ ॥
टिम-टिम करतो थारो, दियो जिन्दगी रो बुझ जावैला, अंधेरो घिरैला जद, कोई न पूछण वालो आवैला, सुख रो ही साथी जग सारो, दुख स्यूं है घबरायो ॥३ ॥
चालै है सांस जितै, सगलां नै लागै तूं सुहावणो, रुकतां ही होवैला, हर पल भारी अणखावणो, “बुद्ध” हुवैला साथी थारो, जो पुण्य पाप कमायो ॥४॥