(लय- उमराव)
कुंकु भरीयो चौपड़ो मोत्यां भरीयो थाल ।
बिरोजी बेगा भात भरणन आवो म्हारा राज ॥
बिरोजी बेगा आइज्यो, भावज ल्याज्यो साथ
बिरो जी प्यारा भाई भतीजा न ल्यावो म्हारा राज
थे बिरा उमराव घणां, सगला में सीरदार
बिरोजी म्हारो मान बढ़ावण आज्यो म्हारा राज
चम चम चमके चून्दड़ी, चमके बाइजी रो बीर
बिरो जी म्हान चूनड़ी ओढ़ावण आइज्यो म्हारा राज.. मायेरो ल्याया धुमधामस्यूं, हरख्यो सो परिवार
भावज तो म्हारी गीतां रो धूम मचाई म्हारा राज
बाई हरखी है घणी भर मोत्यां रो थाल
टीको काढ़ चावस्यूं कर सोलह श्रंगार
बिरो जी म्हारा हंस हंस नेग चुकावो म्हारा राज ***