(तर्ज – नखरालो देवरीयो …)
म्हार बनड़ रो ब्याह मंड्यो बिनायक आओजी
घर कानै चाव चढ्यो विनायक आओ जी ।
म्हार बनड़ …
१) पैली पत्रीका भेजी थाने रिद्धी सिद्ध साग ल्याओ
द्वार खड्या थांरी बाट उडींकां रणक भवर स्यूं आज्यो मतना थे देर करो विनायक आओजी ।
म्हारे घर में ब्याह रच्यो
२) बाबुजी थार तिलक लगावे, माता लाड लडावै काकाजी थांर भोग लगावे, काकी जी चरण पखारै
भैया जी थारी आरती उतारे, भाभी मंगलगावे
जल्दी ही महर करो विनायक आओजी । म्हार बनड़ेको…
३) बनड़ा और बनड़ी ने प्रभु जी, थे ही आशीष देवो
थारे हाथां स्यू दोन्यू को, गठजोड़ो कर देवो ।
म्हारे घर मे डेरा ल्यो, विनायक आओजी
म्हारे बनड़ेको व्याव मंड्यो विनायक आओजी
सारे घर कानै चाव चढ्यो विनायक ओओजी ।