तर्ज :- (भैया मेरे छोटी बहन को न भुलाना)
प्रभु हमें भव भव के बन्धन से छुड़ाना, तेरे सिवा किसको सुनायें ये फसाना ।
क्षत्रिय कुण्ड हुआ जन्म तुम्हारा,
त्रिशला सुत सिद्धार्थ दुलारा,
जय जय बोले सुर नर मिल कर,
गूंज उठा भूमण्डल सारा,
खुशियों का नहीं था ठिकाना ॥ १ ॥
चन्दन बाला के पावों में बेड़ो, आँखों में आँसू की धारा,
उड़द बाकला बहर प्रभु ने उसको भव से पार उतारा,
जाने यह सारा जमाना ॥ २ ॥
जंगल में थे ध्यान लगाये, कीला ग्वाले ने कान में मारा.
उपसर्गों को सहन किया, पर मन में कुछ भी नहीं विचारा,
“वीर मण्डल” गाये गाना ॥ ३ ॥
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