पार्श्व नाथ स्तुति
प्रभु पार्श्व देव चरणों में, शत्-शत् प्रणाम हो।
मेरे मानस के स्वामी ! तुम एक धाम हो ।
१. दुनियां में देव लाखों, हैं पूजे जा रहे ।
जिनदेव ! इस रसना में, तेरा ही नाम हो ॥
२. तुमसे न राग रत्ती, क्यों द्वेष औरों से ?
यह वीतरागता तेरी, मेरा विश्राम हो ॥
३. उऋण बनूं मैं कैसे, उपकार से अहो।
चरणों में चढ़े पन्हैया, यह मेरी चाम हो ॥
४. पा एक बार पारस, हतभाग्य जो रहा। पारस अब स्वयं बनूं मैं, बस वैसा काम हो ॥
५. नस-नस में बस रहे हो, रस ज्यों कवित्व में।
भगवान् ! भक्त ‘तुलसी’ के बस तुम ही राम हो ॥