प्रातः उठ परमेष्ठी वंदन करूं
(लय : कितना बदल गया संसार )
प्रातः उठ परमेष्ठी वंदन, करूं सदा निष्काम।
शांति रहेगी आठों याम।
१. ऋषभ, अजित, संभव, अभिनन्दन, सुमति, पद्मप्रभु पाप निकंदन, नाथ सुपार्श्व, चंद्रप्रभु, सुविधि, शीतलप्रभु से चाहूं सिद्धि, समरूं नित श्रेयांसदेव अरु वासुपूज्य अभिराम।
२. विमल, अनंत, धर्म सुखकारी, शांति, कुंथु, अरि अरसंहारी, मल्लिनाथ, मुनिसुव्रत स्वामी, नमीनाथ, नेमी जगनामी, वामानंदन पारस जिनवर, महावीर महानाम।
३. अर्हत, सीमंधर, युगमंधर, बाहू, सुबाहू, सुजाती जिनवर, स्वयं प्रभु, ऋषभानन ध्याऊं, अनंतवीर्य को शीश नमाऊं, शूर विशाल जिनेश्वर हैं, भक्तों के तिलक ललाम ।
४. चंद्रबाहु, चंद्रानन, विभुवर, वज्रधरेश भुजंग अधीश्वर, ईश्वर नेमी प्रभु शुभंकर, वीरसेन, महाभद्र ज्योतिर्धर, देवयज्ञ श्री अजित विहरमानों को कोटि प्रणाम।
५. गौतममव्यक्त सुधर्मागणधर, मंडित मौर्यपुत्र महिमाधर, अचलभ्रात मेतार्य, मुनीश्वर, अग्निभूति प्रभास प्रभाकर, वायुभूति अकम्पित-सुमिरन हरता कष्ट तमाम ।
६. ब्राह्मी, सुन्दरी, चंदनबाला, कौशल्या, सीता, गुणमाला, कुंती, सुलसा, मृगावतीजी, शिवा, द्रौपदी, राजमतीजी, पद्मा, चूला, प्रभा सुभद्रा दमयन्ती सुखधाम ।
७. भिक्षु, भारमल भाग्यविधाता, रायचन्द जय जश जग त्राता। मधवा, माणिक, डालिम गुरुवर, कालू, तुलसी महाप्रज्ञवर ॥ युवाचार्य श्री महाश्रमण सेपायें नव आयाम ॥
८. श्री सरदार गुलाब शान है, नवलां जेठां सती कान है। महासती झमकु,, लाडांजी, ज्योति-किरण श्री कनक प्रभाजी ॥ ‘सोमलता’ गुरु गुण उपवन मे, रमण करूं अविराम ॥