Sawan Mat Jaijyo,&Sab Miljul Kar Aana

सावण मती जइयो बना नौकरीयां, – २
एक सासु लड़, दूजी जीठाणी लड, तीजी नणदल रा बोल म्हास्यू सयो ए नजाय, सावण मती जइयो ..
. एक मेवलो बरस, दूजी आंधी रे आव, तीजी चमक रही बैरन बीजली, सावण मती जइयो …
एक हीवड़ो बल, दूजी कायारे जल, तीजी बरस रही बैरन अंखीया, सावण मती जइयो
एक मोर बोल दूजो पपइयो बोल, तीजी कूक रही हे कोयलीयां, सावण मती जइयो बना नौकरीयां – २
***
४८.
(तर्ज : मेरे अंगने में तुम्हारा क्या काम है …)
सव मिल जुल के आना हमारे घर शादी है ।
शादी है पर मजा नहीं, कंजूस बने की दादी है।
सौ रूपये का गेहू मंगाया, बोरा ऊपर बोरा है।
चाचा चाची संग में आयें, उनके बच्चे साथ है ।
सब थोड़ा 
थोड़ा खाना, मंहगाई का जमाना है। सब मिलजल…
सौ रुपये की चीनी मंगाई बोरा ऊपर बोरा है।
फूफा भूवा सग में आये उनके बच्चे साथ है । 
तो थोड़ा थोड़ा खाना महंगाई का जमाना है।
 सब मिलजुल 
सौ रुपये का घी मंगाया डिब्बा ऊपर डिब्बा है।
 मामा मामी संग में आये उनके बच्चे साथ है।
तो थोड़ा थोड़ा खाना मंहगाई का जमाना है। सब मिलजूल … ***

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top