शांति जिनेश्वर शांति करो
लय : शान्ति करों सव विघ्न हरों
ओम शांति जिनेश्वर शांति करो, शांति करो सब विघ्न हरो। घट घट में अभय पीयुष भरो ॥ ध्रुव ॥
१. तुझ नाम लिया दुःख द्वन्द मिटै, झट डाकिन भूत पिशाच हटे विष उतरै विषधर काले रो॥
२. दुष्काल मृगी अरु मरी टलै, भूचाल भयंकर युद्ध गर्न कछु जोर चलै न अशुभ ग्रह रो
३. है गरुड़ यक्ष शासन सेवी, निर्वाणी तुझ शासन देणे नित साज करै धार्मिक जन रो
४. अचिरा अरु विश्वसेन नन्दन, कुरु देश महामारी केंद अवतरतां अंत करयो ते दुःख
भव भव में चेतन ओ भटक्यो, प्रभु नरक निगोदा ओ अमे अब शरणो रो है जगदीश्वर
६. देवाधिदेव अरिहंत प्रभु, गुरु महावती निर्यथ 25 शुभधर्म है तेरापंथ
७. दीपांसुत, भारीमाल गणी, ऋषिराय बहुत-शरणो मघ गशिवर
डालिम, कालु री कीर्ति घणी, तुलसी गणपति वैदूर्य माणिक को महाप्रज्ञजी
ध्यानधरो