शांति का संदेश
देखने का कोण बदलें। सोचने का कोण बदलें,
शांत हो आवेश।
हिंसा का कारण है रोटी और गरीबी उसकी चोटी
पर भूखा हिंसा करता जब शांत नहीं आवेश ।।१ ।।
जटिल परिस्थिति जब-जब आती तब-तब हिंसा भी बढ़ जाती ,स्थिति कैसे बदलेगी जब तक शांत नहीं आवेश ।। २ ।।
कभी क्रोध से, कभी लोभ से, कभी घृणा से, कभी क्षोभ से, आवेशित नर हिंसक बनता शांत नहीं आवेश ।। ३ ।।
हिंसा से दीक्षित मानव है, शस्त्र प्रशिक्षण तांडव है,
कैसे हो मस्तिष्क धुलाई शांत नहीं आवेश ।।४।।
नहीं प्रशिक्षण और न शिक्षण है कोरा उपदेश विचक्षण कैसे हो जनमान्य अहिंसा शांत नहीं आवेश ।।५।।
नहीं समस्या को सुलझाएं सिर्फ अहिंसा के गुण गाएं प्रासंगिकता कैसे होगी शांत नहीं आवेश ।। ६ ।।
महावीर का रूप अहिंसा दिव्य शांति का स्तूप अहिंसा महाप्रज्ञ जन जन सुन पाए शाश्वत का निर्देश ।। ७ ।।
– आचार्य श्री महाप्रज्ञ